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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3943

नंबर 3943किताब 49, नंबर 343
حَدَّثَنَا زَيْدُ بْنُ أَخْزَمَ الطَّائِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْقَاهِرِ بْنُ شُعَيْبٍ، قَالَ حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ عِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ، قَالَ مَاتَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم وَهُوَ يَكْرَهُ ثَلاَثَةَ أَحْيَاءٍ ثَقِيفًا وَبَنِي حَنِيفَةَ وَبَنِي أُمَيَّةَ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ ‏.‏
Narrated 'Imran bin Husain:"The Prophet (ﷺ) died while he was having trouble with three tribes: Thaqif, Banu Hanifah, and Banu Umayyah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Daif IsnaadAhmad Muhammad Shakir
  • Daif IsnaadAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।