सीधे कंटेंट पर जाएँ
जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3942

नंबर 3942किताब 49, नंबर 342
حَدَّثَنَا أَبُو سَلَمَةَ يَحْيَى بْنُ خَلَفٍ قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ الثَّقَفِيُّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُثْمَانَ بْنِ خُثَيْمٍ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ أَخْرَقَتْنَا نِبَالُ ثَقِيفٍ فَادْعُ اللَّهَ عَلَيْهِمْ ‏.‏ قَالَ ‏ "‏ اللَّهُمَّ اهْدِ ثَقِيفًا ‏"‏ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ غَرِيبٌ ‏.‏
Narrated Jabir:"They said: 'O Messenger of Allah! Thaqif are razing us with their arrows, so supplicate to Allah against them!' So he said: 'O Allah! Guide Thaqif
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।