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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3922

नंबर 3922किताब 49, नंबर 322
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، عَنْ مَالِكٍ، وَحَدَّثَنَا الأَنْصَارِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا مَعْنٌ، قَالَ حَدَّثَنَا مَالِكٌ، عَنْ عَمْرِو بْنِ أَبِي عَمْرٍو، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم طَلَعَ لَهُ أُحُدٌ فَقَالَ ‏ "‏ هَذَا جَبَلٌ يُحِبُّنَا وَنُحِبُّهُ اللَّهُمَّ إِنَّ إِبْرَاهِيمَ حَرَّمَ مَكَّةَ وَإِنِّي أُحَرِّمُ مَا بَيْنَ لاَبَتَيْهَا ‏"‏ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Narrated Anas bin Malik:that (mount) Uhud appeared to the Messenger of Allah (ﷺ) so he said: "This mountain loves us and we love it. O Allah! Indeed Ibrahim made Makkah sacred, and I make sacred whatever is between its (i.e. Al-Madinah) two lava tracts
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।