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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3909

नंबर 3909किताब 49, नंबर 309
حَدَّثَنَا الْقَاسِمُ بْنُ دِينَارٍ الْكُوفِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ، عَنْ جَعْفَرٍ الأَحْمَرِ، عَنْ عَطَاءِ بْنِ السَّائِبِ، عَنْ أَنَسٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِلأَنْصَارِ وَلأَبْنَاءِ الأَنْصَارِ وَلأَبْنَاءِ أَبْنَاءِ الأَنْصَارِ وَلِنِسَاءِ الأَنْصَارِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ ‏.‏
Narrated Anas:that the Messenger of Allah (ﷺ) said: "O Allah forgive the Ansar and the children of the Ansar, and the children of the children of the Ansar, and the women of the Ansar
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।