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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3890

नंबर 3890किताब 49, नंबर 290
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ عَبْدَةَ الضَّبِّيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا الْمُعْتَمِرُ بْنُ سُلَيْمَانَ، عَنْ حُمَيْدٍ، عَنْ أَنَسٍ قَالَ قِيلَ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَنْ أَحَبُّ النَّاسِ إِلَيْكَ قَالَ ‏"‏ عَائِشَةُ ‏"‏ ‏.‏ قِيلَ مِنَ الرِّجَالِ قَالَ ‏"‏ أَبُوهَا ‏"‏ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ غَرِيبٌ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ مِنْ حَدِيثِ أَنَسٍ ‏.‏
Narrated Anas [May Allah be pleased with him]:"It was said: 'O Messenger of Allah! Who is the most beloved of the people to you?' He said: ''Aishah.' It was said: 'From the men?' He said: 'Her father
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।