सीधे कंटेंट पर जाएँ
जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3844

नंबर 3844किताब 49, नंबर 244
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ لَهِيعَةَ، عَنْ مِشْرَحِ بْنِ هَاعَانَ، عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَسْلَمَ النَّاسُ وَآمَنَ عَمْرُو بْنُ الْعَاصِي ‏"‏ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ حَدِيثِ ابْنِ لَهِيعَةَ عَنْ مِشْرَحِ بْنِ هَاعَانَ وَلَيْسَ إِسْنَادُهُ بِالْقَوِيِّ ‏.‏
Narrated 'Uqbah bin 'Amir:that the Messenger of Allah (ﷺ) said: "The people submitted while 'Amr bin Al-'As believed
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAhmad Muhammad Shakir
  • HasanAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।