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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3741

नंबर 3741किताब 49, नंबर 138
حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ الأَشَجُّ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنُ مَنْصُورٍ الْعَنَزِيُّ، عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَلْقَمَةَ الْيَشْكُرِيِّ، قَالَ سَمِعْتُ عَلِيَّ بْنَ أَبِي طَالِبٍ، قَالَ سَمِعَتْ أُذُنِي، مِنْ فِي رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَهُوَ يَقُولُ ‏ "‏ طَلْحَةُ وَالزُّبَيْرُ جَارَاىَ فِي الْجَنَّةِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ
Narrated 'Ali bin abi Talib:"My ear heard from the mouth of the Messenger of Allah (ﷺ), while he was saying: 'Talhah and Az-Zubair are my neighbors in Paradise
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।