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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3740

नंबर 3740किताब 49, नंबर 137
حَدَّثَنَا عَبْدُ الْقُدُّوسِ بْنُ مُحَمَّدٍ الْعَطَّارُ الْبَصْرِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَاصِمٍ، عَنْ إِسْحَاقَ بْنِ يَحْيَى بْنِ طَلْحَةَ، عَنْ عَمِّهِ، مُوسَى بْنِ طَلْحَةَ قَالَ دَخَلْتُ عَلَى مُعَاوِيَةَ فَقَالَ أَلاَ أُبَشِّرُكَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ طَلْحَةُ مِمَّنْ قَضَى نَحْبَهُ ‏"‏ ‏.‏هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ مِنْ حَدِيثِ مُعَاوِيَةَ إِلاَّ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ ‏.‏
Narrated Musa bin Talhah:"I entered upon Mu'awiyah and he said: 'Shall I not give you some good news?' I said: 'Of course!' He said: 'I heard the Messenger of Allah (ﷺ) saying: 'Talhah is among those who fulfilled their vow (referring to 33:)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAhmad Muhammad Shakir
  • HasanAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।