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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3707

नंबर 3707किताब 49, नंबर 103
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الدَّوْرَقِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا الْعَلاَءُ بْنُ عَبْدِ الْجَبَّارِ، قَالَ حَدَّثَنَا الْحَارِثُ بْنُ عُمَيْرٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ كُنَّا نَقُولُ وَرَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم حَىٌّ أَبُو بَكْرٍ وَعُمَرُ وَعُثْمَانُ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ غَرِيبٌ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ يُسْتَغْرَبُ مِنْ حَدِيثِ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ ‏.‏ وَقَدْ رُوِيَ هَذَا الْحَدِيثُ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ ‏.‏
Narrated Ibn 'Umar:"While the Messenger of Allah (ﷺ) was alive, we used to say: 'Abu Bakr, and (then) 'Umar, and (then) 'Uthman
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।