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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3686

नंबर 3686किताब 49, नंबर 82
حَدَّثَنَا سَلَمَةُ بْنُ شَبِيبٍ، قَالَ حَدَّثَنَا الْمُقْرِئُ، عَنْ حَيْوَةَ بْنِ شُرَيْحٍ، عَنْ بَكْرِ بْنِ عَمْرٍو، عَنْ مِشْرَحِ بْنِ هَاعَانَ، عَنْ عُقْبَةَ بْنِ عَامِرٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لَوْ كَانَ بَعْدِي نَبِيٌّ لَكَانَ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ حَدِيثِ مِشْرَحِ بْنِ هَاعَانَ ‏.‏
Narrated 'Uqbah bin 'Amir:that the Messenger of Allah (ﷺ) said: "If there was to have a Prophet after me, it would have been 'Umar bin Al-Khattab
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAhmad Muhammad Shakir
  • HasanAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।