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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3670

नंबर 3670किताब 49, नंबर 66
حَدَّثَنَا يُوسُفُ بْنُ مُوسَى الْقَطَّانُ الْبَغْدَادِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا مَالِكُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ، عَنْ مَنْصُورِ بْنِ أَبِي الأَسْوَدِ، قَالَ حَدَّثَنِي كَثِيرٌ أَبُو إِسْمَاعِيلَ، عَنْ جُمَيْعِ بْنِ عُمَيْرٍ التَّيْمِيِّ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ لأَبِي بَكْرٍ ‏ "‏ أَنْتَ صَاحِبِي عَلَى الْحَوْضِ وَصَاحِبِي فِي الْغَارِ ‏"‏ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ غَرِيبٌ ‏.‏
Narrated Ibn 'Umar:that the Messenger of Allah (ﷺ) said to Abu Bakr: "You are my companion at the Hawd, and my companion in the cave
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।