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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3654

नंबर 3654किताब 49, नंबर 50
حَدَّثَنَا الْعَبَّاسُ الْعَنْبَرِيُّ وَالْحُسَيْنُ بْنُ مَهْدِيٍّ الْبَصْرِيُّ، قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، قَالَ أُخْبِرْتُ عَنِ ابْنِ شِهَابٍ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، وَقَالَ الْحُسَيْنُ بْنُ مَهْدِيٍّ، فِي حَدِيثِهِ ابْنُ جُرَيْجٍ عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم مَاتَ وَهُوَ ابْنُ ثَلاَثٍ وَسِتِّينَ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَقَدْ رَوَاهُ ابْنُ أَخِي الزُّهْرِيِّ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنْ عُرْوَةَ عَنْ عَائِشَةَ مِثْلَ هَذَا ‏.‏
Narrated 'Aishah [may Allah be pleased with her]:"The Prophet (ﷺ) died when he was sixty-three years old
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।