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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3653

नंबर 3653किताब 49, नंबर 49
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ عَامِرِ بْنِ سَعْدٍ، عَنْ جَرِيرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ أَبِي سُفْيَانَ، أَنَّهُ قَالَ سَمِعْتُهُ يَخْطُبُ، يَقُولُ مَاتَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَهُوَ ابْنُ ثَلاَثٍ وَسِتِّينَ وَأَبُو بَكْرٍ وَعُمَرُ وَأَنَا ابْنُ ثَلاَثٍ وَسِتِّينَ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Narrated Jabir [bin 'Abdullah]:that he heard Mu'awiyah bin Abi Sufyan giving a Khutbah, saying: "The Messenger of Allah (ﷺ) died when he was sixty-three years old, and so did Abu Bakr and 'Umar, and I am sixty-three years old
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 49 · Chapters on Virtues

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।