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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3557

नंबर 3557किताब 48, नंबर 188
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا صَفْوَانُ بْنُ عِيسَى، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَجْلاَنَ، عَنِ الْقَعْقَاعِ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَجُلاً، كَانَ يَدْعُو بِأُصْبُعَيْهِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أَحِّدْ أَحِّدْ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ غَرِيبٌ ‏.‏ وَمَعْنَى هَذَا الْحَدِيثِ إِذَا أَشَارَ الرَّجُلُ بِأُصْبُعَيْهِ فِي الدُّعَاءِ عِنْدَ الشَّهَادَةِ لاَ يُشِيرُ إِلاَّ بِأُصْبُعٍ وَاحِدَةٍ ‏.‏
Abu Hurairah narrated that:A man was supplicating with his two fingers so the Messenger of Allah (ﷺ) said: “Make it one, make it one.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · Chapters on Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।