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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3556

नंबर 3556किताब 48, नंबर 187
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عَدِيٍّ، قَالَ أَنْبَأَنَا جَعْفَرُ بْنُ مَيْمُونٍ، صَاحِبُ الأَنْمَاطِ عَنْ أَبِي عُثْمَانَ النَّهْدِيِّ، عَنْ سَلْمَانَ الْفَارِسِيِّ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِنَّ اللَّهَ حَيِيٌّ كَرِيمٌ يَسْتَحِي إِذَا رَفَعَ الرَّجُلُ إِلَيْهِ يَدَيْهِ أَنْ يَرُدَّهُمَا صِفْرًا خَائِبَتَيْنِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ ‏.‏ وَرَوَاهُ بَعْضُهُمْ وَلَمْ يَرْفَعْهُ ‏.‏
Salman Al-Farsi narrated that the Prophet (ﷺ) said:“Indeed, Allah, is Hayy, Generous, when a man raises his hands to Him, He feels too shy to return them to him empty and rejected.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · Chapters on Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।