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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3515

नंबर 3515किताब 48, नंबर 146
حَدَّثَنَا الْقَاسِمُ بْنُ دِينَارٍ الْكُوفِيُّ، حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ الْكُوفِيُّ، عَنْ إِسْرَائِيلَ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ، وَهُوَ الْمُلَيْكِيُّ عَنْ مُوسَى بْنِ عُقْبَةَ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَا سُئِلَ اللَّهُ شَيْئًا أَحَبَّ إِلَيْهِ مِنْ أَنْ يُسْأَلَ الْعَافِيَةَ ‏"‏ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ حَدِيثِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ الْمُلَيْكِيِّ ‏.‏
Ibn Umar narrated that the Messenger of Allah said (ﷺ):“Allah has not been asked for anything more beloved to Him than being asked for Al-`Āfiyah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · Chapters on Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।