सीधे कंटेंट पर जाएँ
जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3485

नंबर 3485किताब 48, नंबर 116
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ جَعْفَرٍ، عَنْ حُمَيْدٍ، عَنْ أَنَسٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَدْعُو يَقُولُ ‏ "‏ اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْكَسَلِ وَالْهَرَمِ وَالْجُبْنِ وَالْبُخْلِ وَفِتْنَةِ الْمَسِيحِ وَعَذَابِ الْقَبْرِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Anas narrated that :The Prophet (ﷺ) used to supplicate, saying: “O Allah, indeed, I seek refuge in You from laziness, weakness of old age, cowardice, stinginess, the trial of Al-Masih, and the punishment of the grave (Allāhumma innī a`ūdhu bika minal-kasali wal-harami wal-jubni wal-bukhli wa fitnatil-masīḥi wa `adhabil-qabr).”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · Chapters on Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।