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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3384

नंबर 3384किताब 48, नंबर 15
حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ الْمُحَارِبِيُّ، قَالاَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ زَكَرِيَّا بْنِ أَبِي زَائِدَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ خَالِدِ بْنِ سَلَمَةَ، عَنِ الْبَهِيِّ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، رضى الله عنها قَالَتْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَذْكُرُ اللَّهَ عَلَى كُلِّ أَحْيَانِهِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ حَدِيثِ يَحْيَى بْنِ زَكَرِيَّا بْنِ أَبِي زَائِدَةَ وَالْبَهِيُّ اسْمُهُ عَبْدُ اللَّهِ ‏.‏
A'ishah (ra) narrated that :the Messenger of Allah (ﷺ) used to remember Allah in all of his affairs
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 48 · Chapters on Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।