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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 3089

नंबर 3089किताब 47, नंबर 141
حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنِ الْحَارِثِ، عَنْ عَلِيٍّ، قَالَ يَوْمُ الْحَجِّ الأَكْبَرِ يَوْمُ النَّحْرِ ‏.‏ قَالَ هَذَا الْحَدِيثُ أَصَحُّ مِنْ حَدِيثِ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَاقَ لأَنَّهُ رُوِيَ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ هَذَا الْحَدِيثُ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ عَنِ الْحَارِثِ عَنْ عَلِيٍّ مَوْقُوفًا وَلاَ نَعْلَمُ أَحَدًا رَفَعَهُ إِلاَّ مَا رُوِيَ عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ إِسْحَاقَ وَقَدْ رَوَى شُعْبَةُ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُرَّةَ عَنِ الْحَارِثِ عَنْ عَلِيٍّ مَوْقُوفًا ‏.‏
Narrated 'Ali:"The day of Al-Hajj Al-Akbar is the day of An-Nahr
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 47 · Chapters on Tafsir

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।