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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2938

नंबर 2938किताब 46, नंबर 12
حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ هِلاَلٍ الصَّوَّافُ الْبَصْرِيُّ ، قَالَ حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ سُلَيْمَانَ الضُّبَعِيُّ، عَنْ هَارُونَ الأَعْوَرِ، عَنْ بُدَيْلِ بْنِ مَيْسَرَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ شَقِيقٍ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَقْرَأُ ‏(‏فَرُوحٌ وَ رَيْحَانٌ وَ جَنَّةُ نَعِيمٍ‏)‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ حَدِيثِ هَارُونَ الأَعْوَرِ ‏.‏
Narrated 'Aishah:that the Prophet (ﷺ) would recite: "Furuhun Wa Raihanun Wa Jannatu Na'im (56:)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih IsnaadAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 46 · Chapters on Recitation

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।