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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2937

नंबर 2937किताब 46, नंबर 11
حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو أَحْمَدَ الزُّبَيْرِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنِ الأَسْوَدِ بْنِ يَزِيدَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَقْرَأُ ‏(‏فَهَلْ مِنْ مُدَّكِرٍ ‏)‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Narrated 'Abdullah bin Mas'ud:that the Messenger of Allah (ﷺ) would recite: "Then is there anyone who would remember? (54:)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 46 · Chapters on Recitation

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।