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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2921

नंबर 2921किताब 45, नंबर 47
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ، قَالَ أَخْبَرَنَا بَقِيَّةُ بْنُ الْوَلِيدِ، عَنْ بَحِيرِ بْنِ سَعْدٍ، عَنْ خَالِدِ بْنِ مَعْدَانَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بِلاَلٍ، عَنْ عِرْبَاضِ بْنِ سَارِيَةَ، أَنَّهُ حَدَّثَهُ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَقْرَأُ الْمُسَبِّحَاتِ قَبْلَ أَنْ يَرْقُدَ وَيَقُولُ ‏ "‏ إِنَّ فِيهِنَّ آيَةً خَيْرٌ مِنْ أَلْفِ آيَةٍ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ ‏.‏
Narrated 'Irbad bin Sariyah:that the Prophet (ﷺ) would recite the Musabbihat (Chapters 17, 57, 59, 61, 62, 64 & 87) before sleep and say "Indeed there is an Ayah in them that is better than one thousand Ayat
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAhmad Muhammad Shakir
  • HasanAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · Chapters on The Virtues of the Qur'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।