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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2920

नंबर 2920किताब 45, नंबर 46
حَدَّثَنَا صَالِحُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ أَبِي لُبَابَةَ، قَالَ قَالَتْ عَائِشَةُ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم لاَ يَنَامُ حَتَّى يَقْرَأَ بَنِي إِسْرَائِيلَ وَالزُّمَرَ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ ‏.‏ وَأَبُو لُبَابَةَ شَيْخٌ بَصْرِيٌّ قَدْ رَوَى عَنْهُ حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ غَيْرَ حَدِيثٍ وَيُقَالُ اسْمُهُ مَرْوَانُ ‏.‏ أَخْبَرَنِي بِذَلِكَ مُحَمَّدُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ فِي كِتَابِ التَّارِيخِ ‏.‏
Narrated 'Aishah:"The Prophet (ﷺ) would not sleep until he recited Surat Bani Isra'il and Az-Zumar
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 45 · Chapters on The Virtues of the Qur'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।