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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2874

नंबर 2874किताब 44, नंबर 17
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ‏ حَدَّثَنَا الْمُغِيرَةُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ أَبِي الزِّنَادِ، عَنِ الأَعْرَجِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِنَّمَا مَثَلِي وَمَثَلُ أُمَّتِي كَمَثَلِ رَجُلٍ اسْتَوْقَدَ نَارًا فَجَعَلَتِ الذُّبَابُ وَالْفَرَاشُ يَقَعْنَ فِيهَا وَأَنَا آخُذُ بِحُجَزِكُمْ وَأَنْتُمْ تَقَحَّمُونَ فِيهَا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَقَدْ رُوِيَ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ ‏.‏
Narrated Abu Hurairah:that the Messenger of Allah (ﷺ) said: "The Parable of myself and that of my Ummah is that of a man who kindled a fire, and the flies and moths began flying into it - and I am trying to prevent you from diving into it
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 44 · Chapters on Parables

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।