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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2854

नंबर 2854किताब 43, नंबर 129
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ مُوسَى الأَنْصَارِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، عَنْ عَبْدِ الْجَبَّارِ بْنِ عُمَرَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ نَهَى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ يَنَامَ الرَّجُلُ عَلَى سَطْحٍ لَيْسَ بِمَحْجُورٍ عَلَيْهِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ مِنْ حَدِيثِ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ عَنْ جَابِرٍ إِلاَّ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ ‏.‏ وَعَبْدُ الْجَبَّارِ بْنُ عُمَرَ الأَيْلِيُّ يُضَعَّفُ ‏.‏
Narrated Jabir:"The Messenger of Allah (ﷺ) prohibited that a man sleep on a terrace without something to obstruct him (so that he will not roll off and fall)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · Chapters on Manners

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।