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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2844

नंबर 2844किताब 43, नंबर 118
حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ الأَشَجُّ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ أَبِي غَنِيَّةَ، حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ عَاصِمٍ، عَنْ زِرٍّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ مِنَ الشِّعْرِ حِكْمَةً ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ إِنَّمَا رَفَعَهُ أَبُو سَعِيدٍ الأَشَجُّ عَنِ ابْنِ أَبِي غَنِيَّةَ ‏.‏ وَرَوَى غَيْرُهُ عَنِ ابْنِ أَبِي غَنِيَّةَ هَذَا الْحَدِيثَ مَوْقُوفًا ‏.‏ وَقَدْ رُوِيَ هَذَا الْحَدِيثُ مِنْ غَيْرِ هَذَا الْوَجْهِ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ مَسْعُودٍ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ وَفِي الْبَابِ عَنْ أُبَىِّ بْنِ كَعْبٍ وَابْنِ عَبَّاسٍ وَعَائِشَةَ وَبُرَيْدَةَ وَكَثِيرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِيهِ عَنْ جَدِّهِ ‏.‏
Narrated 'Abdullah:that the Messenger of Allah (ﷺ) said: "Indeed some poetry is wisdom
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAhmad Muhammad Shakir
  • Hasan SahihAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · Chapters on Manners

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।