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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2843

नंबर 2843किताब 43, नंबर 117
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ، حَدَّثَنَا فِطْرُ بْنُ خَلِيفَةَ، حَدَّثَنِي مُنْذِرٌ، وَهُوَ الثَّوْرِيُّ عَنْ مُحَمَّدِ ابْنِ الْحَنَفِيَّةِ، عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ، أَنَّهُ قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَرَأَيْتَ إِنْ وُلِدَ لِي بَعْدَكَ أُسَمِّيهِ مُحَمَّدًا وَأُكْنِيهِ بِكُنْيَتِكَ قَالَ ‏ "‏ نَعَمْ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ فَكَانَتْ رُخْصَةً لِي ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Narrated 'Ali bin Abi Talib:that he said: "O Messenger of Allah (ﷺ)! If I have a son after you do you think I could name him your Kunyah?" He said: "Yes." So he said: "So that was permitted for me
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • SahihBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · Chapters on Manners

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।