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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2838

नंबर 2838किताब 43, नंबर 112
حَدَّثَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ الدَّوْرَقِيُّ، وَأَبُو بَكْرٍ مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ وَغَيْرُ وَاحِدٍ قَالُوا حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم غَيَّرَ اسْمَ عَاصِيَةَ وَقَالَ ‏ "‏ أَنْتِ جَمِيلَةُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ ‏.‏ وَإِنَّمَا أَسْنَدَهُ يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ الْقَطَّانُ عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ نَافِعٍ عَنِ ابْنِ عُمَرَ وَرَوَى بَعْضُهُمْ هَذَا عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ نَافِعٍ أَنَّ عُمَرَ ‏.‏ وَفِي الْبَابِ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ سَلاَمٍ وَعَبْدِ اللَّهِ بْنِ مُطِيعٍ وَعَائِشَةَ وَالْحَكَمِ بْنِ سَعْدٍ وَمُسْلِمٍ وَأُسَامَةَ بْنِ أَخْدَرِيٍّ وَشُرَيْحِ بْنِ هَانِئٍ عَنْ أَبِيهِ وَخَيْثَمَةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ عَنْ أَبِيهِ ‏.‏
Narrated Ibn 'Umar:that the Prophet (ﷺ) changed the name of 'Asiyah, he said: "You are Jamilah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Bukhari And MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · Chapters on Manners

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।