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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2830

नंबर 2830किताब 43, नंबर 104
وَقَدْ رَوَى غَيْرُ، وَاحِدٍ، هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ، عَنْ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ، قَالَ جَمَعَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَبَوَيْهِ يَوْمَ أُحُدٍ قَالَ ‏ "‏ ارْمِ فِدَاكَ أَبِي وَأُمِّي ‏"‏ ‏.‏ حَدَّثَنَا بِذَلِكَ قُتَيْبَةُ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ وَعَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ مُحَمَّدٍ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ عَنْ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ قَالَ جَمَعَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَبَوَيْهِ يَوْمَ أُحُدٍ ‏.‏ وَهَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ وَكِلاَ الْحَدِيثَيْنِ صَحِيحٌ ‏.‏
Narrated Sa'd bin Abi Waqqas:"The Messenger of Allah (ﷺ) mentioned both of his parents to me on the Day of Uhud
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · Chapters on Manners

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।