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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2811.2

नंबर 2811.2किताब 43, नंबर 85
وَرَوَى شُعْبَةُ، وَالثَّوْرِيُّ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنِ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ، قَالَ رَأَيْتُ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم حُلَّةً حَمْرَاءَ ‏.‏ حَدَّثَنَا بِذَلِكَ مَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا مَحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ بِهَذَا ‏.‏ وَفِي الْحَدِيثِ كَلاَمٌ أَكْثَرُ مِنْ هَذَا ‏.‏ قَالَ سَأَلْتُ مُحَمَّدًا قُلْتُ لَهُ حَدِيثُ أَبِي إِسْحَاقَ عَنِ الْبَرَاءِ أَصَحُّ أَوْ حَدِيثُ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ فَرَأَى كِلاَ الْحَدِيثَيْنِ صَحِيحًا ‏.‏ وَفِي الْبَابِ عَنِ الْبَرَاءِ وَأَبِي جُحَيْفَةَ ‏.‏
Shu'bah and Ath-Thawri reported it from Abu Ishaq from Al-Bara bin 'Azib who said:"I saw a red Hullah on the Messenger of Allah." (Another chain of narration)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · Chapters on Manners

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।