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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2811

नंबर 2811किताब 43, नंबर 84
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ، حَدَّثَنَا عَبْثَرُ بْنُ الْقَاسِمِ، عَنِ الأَشْعَثِ، وَهُوَ ابْنُ سَوَّارٍ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي لَيْلَةٍ إِضْحِيَانٍ فَجَعَلْتُ أَنْظُرُ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَإِلَى الْقَمَرِ وَعَلَيْهِ حُلَّةٌ حَمْرَاءُ فَإِذَا هُوَ عِنْدِي أَحْسَنُ مِنَ الْقَمَرِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ حَدِيثِ الأَشْعَثِ ‏.‏
Narrated Jabir Bin Samurah:"I saw the Prophet (ﷺ) on a clear night, so I looked at the Messenger of Allah (ﷺ) and at the moon, and he was wearing a red Hullah, and he looked better than the moon to me
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · Chapters on Manners

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।