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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2766

नंबर 2766किताब 43, नंबर 36
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ بْنُ أَسْبَاطِ بْنِ مُحَمَّدٍ الْقُرَشِيُّ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ التَّيْمِيُّ، عَنْ خِدَاشٍ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِذَا اسْتَلْقَى أَحَدُكُمْ عَلَى ظَهْرِهِ فَلاَ يَضَعْ إِحْدَى رِجْلَيْهِ عَلَى الأُخْرَى ‏"‏ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ رَوَاهُ غَيْرُ وَاحِدٍ عَنْ سُلَيْمَانَ التَّيْمِيِّ ‏.‏ وَلاَ يُعْرَفُ خِدَاشٌ هَذَا مَنْ هُوَ وَقَدْ رَوَى لَهُ سُلَيْمَانُ التَّيْمِيُّ غَيْرَ حَدِيثٍ ‏.‏
Narrated Jabir:"The Messenger of Allah (ﷺ) prohibited Ishtimal As-Samma, Al-Ihtiba in one garment, and that a man raise one of his feet atop the other while he is reclining on his back
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · Chapters on Manners

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।