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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2765

नंबर 2765किताब 43, नंबर 35
حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْمَخْزُومِيُّ، وَغَيْرُ، وَاحِدٍ، قَالُوا حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عن عَبَّادِ بْنِ تَمِيمٍ، عَنْ عَمِّهِ، أَنَّهُ رَأَى النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم مُسْتَلْقِيًا فِي الْمَسْجِدِ وَاضِعًا إِحْدَى رِجْلَيْهِ عَلَى الأُخْرَى ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَعَمُّ عَبَّادِ بْنِ تَمِيمٍ هُوَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ زَيْدِ بْنِ عَاصِمٍ الْمَازِنِيُّ ‏.‏
Narrated 'Abbad bin Tamim:from his paternal uncle, that he saw the Prophet (ﷺ) reclining in the Masjid, and placing one of his feet atop another
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · Chapters on Manners

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।