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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2760

नंबर 2760किताब 43, नंबर 30
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُمَرَ بْنِ الْوَلِيدِ الْكِنْدِيُّ الْكُوفِيُّ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ، عَنْ إِسْرَائِيلَ، عَنْ سِمَاكٍ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَقُصُّ أَوْ يَأْخُذُ مِنْ شَارِبِهِ وَكَانَ إِبْرَاهِيمُ خَلِيلُ الرَّحْمَنِ يَفْعَلُهُ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ ‏.‏
Narrated Ibn 'Abbas:"The Prophet (ﷺ) would pare, or take from his mustache, and Ibrahim Khalilur-Rahman would do it (as well)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Daif IsnaadAhmad Muhammad Shakir
  • Daif IsnaadAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · Chapters on Manners

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।