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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2752

नंबर 2752किताब 43, नंबर 22
حَدَّثَنَا سُوَيْدٌ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ، أَخْبَرَنَا أُسَامَةُ بْنُ زَيْدٍ، حَدَّثَنِي عَمْرُو بْنُ شُعَيْبٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ يَحِلُّ لِلرَّجُلِ أَنْ يُفَرِّقَ بَيْنَ اثْنَيْنِ إِلاَّ بِإِذْنِهِمَا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَقَدْ رَوَاهُ عَامِرٌ الأَحْوَلُ عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ أَيْضًا ‏.‏
Narrated 'Abdullah bin 'Amr:that the Messenger of Allah (ﷺ) said: "It is not lawful for a man to separate two people except with their permission
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAhmad Muhammad Shakir
  • Hasan SahihAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 43 · Chapters on Manners

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।