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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2686

नंबर 2686किताब 41, नंबर 42
حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ حَفْصٍ الشَّيْبَانِيُّ الْبَصْرِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ الْحَارِثِ، عَنْ دَرَّاجٍ، عَنْ أَبِي الْهَيْثَمِ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لَنْ يَشْبَعَ الْمُؤْمِنُ مِنْ خَيْرٍ يَسْمَعُهُ حَتَّى يَكُونَ مُنْتَهَاهُ الْجَنَّةُ ‏"‏ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ ‏.‏
Narrated Abu Sa'eed Al-Khudri:that the Messenger of Allah (ﷺ) said: "The believer will never be satisfied with the good he hears, until he ends up in Paradise
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 41 · Chapters on Knowledge

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।