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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 507

नंबर 507किताब 4, नंबर 20
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، وَهَنَّادٌ، قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو الأَحْوَصِ، عَنْ سِمَاكِ بْنِ حَرْبٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ، قَالَ كُنْتُ أُصَلِّي مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَكَانَتْ صَلاَتُهُ قَصْدًا وَخُطْبَتُهُ قَصْدًا ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنْ عَمَّارِ بْنِ يَاسِرٍ وَابْنِ أَبِي أَوْفَى ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ جَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Jabir bin Samurah narrated:"I would pray with the Prophet, and his prayer was moderate, and his Khutbah was moderate
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book on the Day of Friday

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।