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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 506

नंबर 506किताब 4, नंबर 19
حَدَّثَنَا حُمَيْدُ بْنُ مَسْعَدَةَ الْبَصْرِيُّ، حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ الْحَارِثِ، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَخْطُبُ يَوْمَ الْجُمُعَةِ ثُمَّ يَجْلِسُ ثُمَّ يَقُومُ فَيَخْطُبُ قَالَ مِثْلَ مَا تَفْعَلُونَ الْيَوْمَ ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ وَجَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ وَجَابِرِ بْنِ سَمُرَةَ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ ابْنِ عُمَرَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَهُوَ الَّذِي رَآهُ أَهْلُ الْعِلْمِ أَنْ يَفْصِلَ بَيْنَ الْخُطْبَتَيْنِ بِجُلُوسٍ ‏.‏
Ibn Umar narrated:"The Prophet would give a Khutbah on Friday, then sit, then stand and give (another) Khutbah." He said: "Similar to what they do today
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book on the Day of Friday

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।