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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2579

नंबर 2579किताब 39, नंबर 7
حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا مُصْعَبُ بْنُ الْمِقْدَامِ، عَنْ فُضَيْلِ بْنِ غَزْوَانَ، عَنْ أَبِي حَازِمٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، رَفَعَهُ قَالَ ‏ "‏ ضِرْسُ الْكَافِرِ مِثْلُ أُحُدٍ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ ‏.‏ وَأَبُو حَازِمٍ هُوَ الأَشْجَعِيُّ اسْمُهُ سَلْمَانُ مَوْلَى عَزَّةَ الأَشْجَعِيَّةِ ‏.‏
Abu Hurairah narrated a Marfu' narration:"The molar teeth of the disbeliever will be like Uhud (mountain)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 39 · The Book on the Description of Hellfire

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।