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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2470

नंबर 2470किताब 37, नंबर 56
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ أَبِي مَيْسَرَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّهُمْ ذَبَحُوا شَاةً فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ مَا بَقِيَ مِنْهَا ‏"‏ ‏.‏ قَالَتْ مَا بَقِيَ مِنْهَا إِلاَّ كَتِفُهَا ‏.‏ قَالَ ‏"‏ بَقِيَ كُلُّهَا غَيْرَ كَتِفِهَا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَأَبُو مَيْسَرَةَ هُوَ الْهَمْدَانِيُّ اسْمُهُ عَمْرُو بْنُ شُرَحْبِيلَ ‏.‏
आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) कहती हैं कि लोगों ने एक बकरी ज़बह किया, तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने पूछा : "उसका कितना भाग कितना भाग बचा हुआ है?" लोगों ने उत्तर दिया : केवल उसका कंधा बचा हुआ है। आपने कहा : "कंधे के सिवा पूरा बचा हुआ है।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • SahihBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 37 · Chapters on the description of the Day of Judgement, Ar-Riqaq, and Al-Wara'

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।