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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2401

नंबर 2401किताब 36, नंबर 99
حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا سُفْيَانُ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، رَفَعَهُ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ يَقُولُ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ مَنْ أَذْهَبْتُ حَبِيبَتَيْهِ فَصَبَرَ وَاحْتَسَبَ لَمْ أَرْضَ لَهُ ثَوَابًا دُونَ الْجَنَّةِ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي الْبَابِ عَنْ عِرْبَاضِ بْنِ سَارِيَةَ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Abu Hurairah (narrated from) the Prophet(s.a.w) who said:"Allah, Mighty and Sublime is He, said: 'For whomever I take his sight, and he is patient and seeking a reward, I shall not be satisfied with any reward for him less than Paradise
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 36 · Chapters On Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।