सीधे कंटेंट पर जाएँ
जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2355

नंबर 2355किताब 36, नंबर 52
حَدَّثَنَا الْعَبَّاسُ بْنُ مُحَمَّدٍ الدُّورِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يَزِيدَ الْمُقْرِئُ، حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ أَبِي أَيُّوبَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ جَابِرٍ الْحَضْرَمِيِّ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ يَدْخُلُ فُقَرَاءُ الْمُسْلِمِينَ الْجَنَّةَ قَبْلَ أَغْنِيَائِهِمْ بِأَرْبَعِينَ خَرِيفًا ‏"‏ ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ ‏.‏
Jabir bin 'Abdullah narrated that the Messenger of Allah (s.a.w) said:"The poor Muslims are admitted into Paradise before their rich by forty autumns
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 36 · Chapters On Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।