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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 2354

नंबर 2354किताब 36, नंबर 51
حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا الْمُحَارِبِيُّ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَمْرٍو، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ يَدْخُلُ فُقَرَاءُ الْمُسْلِمِينَ الْجَنَّةَ قَبْلَ أَغْنِيَائِهِمْ بِنِصْفِ يَوْمٍ وَهُوَ خَمْسُمِائَةِ عَامٍ ‏"‏ ‏.‏ وَهَذَا حَدِيثٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Abu Hurairah narrated that the Messenger of Allah (s.a.w) said:"The poor Muslims are admitted into Paradise before their rich by half a day. And that is five hundred years
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAhmad Muhammad Shakir
  • Hasan SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 36 · Chapters On Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।