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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 456

नंबर 456किताब 3, नंबर 5
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ، حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ عَيَّاشٍ، حَدَّثَنَا أَبُو حَصِينٍ، عَنْ يَحْيَى بْنِ وَثَّابٍ، عَنْ مَسْرُوقٍ، أَنَّهُ سَأَلَ عَائِشَةَ عَنْ وِتْرِ، رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَتْ مِنْ كُلِّ اللَّيْلِ قَدْ أَوْتَرَ أَوَّلِهِ وَأَوْسَطِهِ وَآخِرِهِ فَانْتَهَى وِتْرُهُ حِينَ مَاتَ إِلَى السَّحَرِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى أَبُو حَصِينٍ اسْمُهُ عُثْمَانُ بْنُ عَاصِمٍ الأَسَدِيُّ ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنْ عَلِيٍّ وَجَابِرٍ وَأَبِي مَسْعُودٍ الأَنْصَارِيِّ وَأَبِي قَتَادَةَ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عَائِشَةَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَهُوَ الَّذِي اخْتَارَهُ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ الْوِتْرُ مِنْ آخِرِ اللَّيْلِ ‏.‏
Masruq narrated that :he asked Aishah about the Witr of the Prophet. She said: "He would perform Witr during all of the night; (either) its beginning, its middle, or its end. So when he died, his Witr ended, during the approachof As-Sahar
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 3 · The Book on Al-Witr

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।