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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 454

नंबर 454किताब 3, नंबर 3
وَرَوَى سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ، وَغَيْرُهُ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ عَاصِمِ بْنِ ضَمْرَةَ، عَنْ عَلِيٍّ، قَالَ الْوِتْرُ لَيْسَ بِحَتْمٍ كَهَيْئَةِ الصَّلاَةِ الْمَكْتُوبَةِ وَلَكِنْ سُنَّةٌ سَنَّهَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ حَدَّثَنَا بِذَلِكَ مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ عَنْ سُفْيَانَ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ ‏.‏ وَهَذَا أَصَحُّ مِنْ حَدِيثِ أَبِي بَكْرِ بْنِ عَيَّاشٍ ‏.‏ وَقَدْ رَوَاهُ مَنْصُورُ بْنُ الْمُعْتَمِرِ عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ نَحْوَ رِوَايَةِ أَبِي بَكْرِ بْنِ عَيَّاشٍ ‏.‏
Sufyan Ath-Thawri and others reported from Abu Ishaq, from Asim bin Damrah, that :Ali said: "Al-Witr is not incumbent like the status of the obligatory prayers, but it is a Sunnah which Allah's Messenger practiced
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 3 · The Book on Al-Witr

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।