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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1588

नंबर 1588किताब 21, नंबर 50
حَدَّثَنَا الْحُسَيْنُ بْنُ أَبِي كَبْشَةَ الْبَصْرِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ، عَنْ مَالِكٍ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنِ السَّائِبِ بْنِ يَزِيدَ، قَالَ أَخَذَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم الْجِزْيَةَ مِنْ مَجُوسِ الْبَحْرَيْنِ وَأَخَذَهَا عُمَرُ مِنْ فَارِسَ وَأَخَذَهَا عُثْمَانُ مِنَ الْفُرْسِ ‏.‏ وَسَأَلْتُ مُحَمَّدًا عَنْ هَذَا فَقَالَ هُوَ مَالِكٌ عَنِ الزُّهْرِيِّ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏
Narrated Malik :From Az-Zuhri, that Sa'ib bin Yazid said: "The Messenger of Allah (ﷺ) took the Jizyah from the Zoroastrians of Bahrain, and 'Umar took it in Persia, and 'Uthman took it from the Persians." I asked Muhammad about this, so he said: "It is: 'Malik from Az-Zuhri from the Prophet (ﷺ)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book on Military Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।