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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1587

नंबर 1587किताब 21, नंबर 49
حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، عَنْ بَجَالَةَ، أَنَّ عُمَرَ، كَانَ لاَ يَأْخُذُ الْجِزْيَةَ مِنَ الْمَجُوسِ حَتَّى أَخْبَرَهُ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَوْفٍ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم أَخَذَ الْجِزْيَةَ مِنْ مَجُوسِ هَجَرَ ‏.‏ وَفِي الْحَدِيثِ كَلاَمٌ أَكْثَرُ مِنْ هَذَا ‏.‏ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Narrated Bajalah: That 'Umar would not take the Jizyah from the Zoroastrians until 'Abdur-Rahman bin 'Awf informed him that the Prophet (ﷺ) took Jizyah from the Zoroastrians of Hajar." There is more dialogue in the Hadith than this. And this Hadith is Hasan Sahih
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book on Military Expeditions

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।