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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 448

नंबर 448किताब 2, नंबर 301
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ، مُحَمَّدُ بْنُ نَافِعٍ الْبَصْرِيُّ حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ بْنُ عَبْدِ الْوَارِثِ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ مُسْلِمٍ الْعَبْدِيِّ، عَنْ أَبِي الْمُتَوَكِّلِ النَّاجِيِّ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ قَامَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم بِآيَةٍ مِنَ الْقُرْآنِ لَيْلَةً ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ ‏.‏
आयशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- से रिवायत है, उन्होंने फरमाया किः नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक बार सारी रात एक आयत को ही निरंतर पढ़ते हुए क़्याम किया।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih IsnaadAhmad Muhammad Shakir
  • Sahih IsnaadAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।