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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 320

नंबर 320किताब 2, नंबर 172
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ بْنُ سَعِيدٍ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ جُحَادَةَ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ لَعَنَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم زَائِرَاتِ الْقُبُورِ وَالْمَتَّخِذِينَ عَلَيْهَا الْمَسَاجِدَ وَالسُّرُجَ ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ وَعَائِشَةَ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ ابْنِ عَبَّاسٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ ‏.‏ وَأَبُو صَالِحٍ هَذَا هُوَ مَوْلَى أُمِّ هَانِئٍ بِنْتِ أَبِي طَالِبٍ وَاسْمُهُ بَاذَانُ وَيُقَالُ بَاذَامُ أَيْضًا ‏.‏
Ibn Abbbas narrated:"Allah's Messenger cursed the women who visit the graves, and those who use them as Masajid and put torches on them
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।