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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 285

नंबर 285किताब 2, नंबर 137
حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ الْخَلاَّلُ الْحُلْوَانِيُّ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ، عَنْ زَيْدِ بْنِ حُبَابٍ، عَنْ كَامِلٍ أَبِي الْعَلاَءِ، نَحْوَهُ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ ‏.‏ وَهَكَذَا رُوِيَ عَنْ عَلِيٍّ، ‏.‏ وَبِهِ يَقُولُ الشَّافِعِيُّ وَأَحْمَدُ وَإِسْحَاقُ يَرَوْنَ هَذَا جَائِزًا فِي الْمَكْتُوبَةِ وَالتَّطَوُّعِ ‏.‏ وَرَوَى بَعْضُهُمْ هَذَا الْحَدِيثَ عَنْ كَامِلٍ أَبِي الْعَلاَءِ مُرْسَلاً ‏.‏
Ibn Abbas narrated:(Another chain) which is similar
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।